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Jalaun News: मुकेश सहनी समेत VIP नेताओं पर FIR, पार्टी ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | उत्तर प्रदेश के जालौन में मुकेश सहनी समेत VIP नेताओं और कार्यकर्ताओं पर FIR के बाद पार्टी ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

डेस्क, जालौन, 25 अगस्त। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी समेत पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

VIP के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 24 अगस्त को जालौन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखने की कोशिश की थी। इसी घटनाक्रम के बाद उरई कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 196, 223 और 324(4) का उल्लेख किया गया है।

पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करना पुलिस की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन किसी राजनीतिक या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई से पहले पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी है। VIP का आरोप है कि जनहित और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे उठाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जाने से लोकतांत्रिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

कार्रवाई पर VIP ने मांगा जवाब

देव ज्योति ने कहा कि VIP गरीब, पिछड़े, वंचित और निषाद समाज से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रही है। पार्टी का दावा है कि सामाजिक न्याय और अधिकारों से संबंधित मांगों को सार्वजनिक मंचों पर रखने का उसका लोकतांत्रिक अधिकार है।

VIP प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि किसी राजनीतिक कार्यकर्ता को अपनी बात रखने से रोका जाता है और विरोध के बाद उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है, तो लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का रास्ता क्या बचेगा।

हालांकि, मामले में पुलिस की ओर से लगाए गए आरोप और FIR में दर्ज धाराएं कानूनी जांच का विषय हैं। प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में आरोपों का अंतिम रूप से साबित होना नहीं माना जाता। आगे की जांच में घटनाक्रम, वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

निष्पक्ष जांच की मांग

VIP ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। पार्टी प्रवक्ता का कहना है कि जांच में किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए और कार्रवाई कानून के प्रावधानों के अनुसार होनी चाहिए।

देव ज्योति ने कहा कि यदि किसी नेता या कार्यकर्ता की भूमिका मामले में सामने आती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

मुकेश सहनी के समर्थन में पार्टी

FIR में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी का नाम आने के बाद VIP ने साफ किया है कि वह अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है। पार्टी ने संकेत दिया है कि इस मामले को लेकर वह कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात आगे रखेगी।

पार्टी का कहना है कि सामाजिक न्याय, आरक्षण और वंचित समुदायों के अधिकार उसके प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हैं। इन मुद्दों को लेकर भविष्य में भी कार्यक्रम और आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।

कार्रवाई बढ़ी तो विरोध की चेतावनी

VIP प्रवक्ता ने कहा कि अगर जांच के दौरान निर्दोष नेताओं या कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया अथवा राजनीतिक दबाव में कार्रवाई आगे बढ़ाई गई, तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी।

फिलहाल जालौन में दर्ज FIR के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आ रही है। मामले की वास्तविक तस्वीर पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस प्रकरण को लेकर VIP की ओर से आगे की रणनीति और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी रहेगी।

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FIR के बाद सियासत, जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर

किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज होना अपने आप में गंभीर राजनीतिक विषय बन जाता है। लेकिन ऐसे मामलों में आरोप और दोषसिद्धि के बीच अंतर समझना जरूरी है। प्राथमिकी जांच की शुरुआत होती है, अंतिम फैसला नहीं।

जालौन मामले में VIP ने जहां कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं, वहीं पुलिस के पास दर्ज FIR के आधार पर जांच आगे बढ़ाने का अधिकार है। निष्पक्ष जांच का मतलब यही है कि सभी पक्षों के बयान, उपलब्ध वीडियो, मौके के साक्ष्य और FIR में लगाए गए आरोपों की कानूनी कसौटी पर जांच हो।

मुकेश सहनी की पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। अब इस पूरे विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने लाना सबसे महत्वपूर्ण होगा। यदि किसी की भूमिका कानून का उल्लंघन करने में सामने आती है तो कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। यही लोकतांत्रिक और कानूनी व्यवस्था की मूल भावना है।

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